मंत्रालय ने जिलों को नशा मुक्त घोषित करने के जो मानक बनाए :-
- उनमें जिलों में उपचार की व्यवस्था का होना
- स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालयों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तंबाकू और शराब की दूकान का न होना
- जिले में मौजूद कम से कम 75 फीसद शैक्षणिक संस्थानों और छात्रावासों का नशा मुक्त घोषित होना
- जिले के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इससे निपटने के लिए नीति होना
- जिलों में नशे का इस्तेमाल करने वालों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के नियम होना
- जिले के कम से कम 50 फीसद ग्रामीणों द्वारा खुद को नशा मुक्त घोषित करना
- जिले के 75 फीसद युवाओं का नशा मुक्ति अभियान से जुड़ा होना
www.youngorganiser.com Jammu (Tawi) 180001 (J&K Union Territory) Updated, 26th Jun. 2021, Sat. 1: 16 PM (IST) : टीम डिजिटल: Arun Gavaskar नई दिल्ली : युवाओं में नशे की बढ़ती लत से चिंतित सरकार ने वर्ष 2022 तक देश के सौ जिलों को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसका एलान भी वह करेगी। इसे लेकर सरकार ने ऐसे सभी 272 जिलों में नशा मुक्ति अभियान तेज किया है जो सबसे ज्यादा संवदेनशील हैं। सर्वे में इन जिलों में नशा करने वालों की संख्या करीब सात करोड़ पाई गई थी। इनमें करीब 70 लाख गंभीर रूप से नशे की गिरफ्त में पाए गए। इन जिलों में फिलहाल गांव-गांव तक नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले कार्यकर्ता नियुक्त किए जा रहे हैं। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक, जिलों को नशा मुक्त घोषित करने के मानक भी तैयार कर लिए गए हैं। हालांकि, मंत्रालय का ज्यादा फोकस लोगों के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता पैदा करना ही है। इसके लिए मंत्रालय ने राज्यों के साथ शैक्षणिक संस्थानों को इस मुहिम से विशेष रूप से जोड़ा है। मंत्रालय ने इसमें ग्राम पंचायतों को भी जोड़ने की योजना बनाई है। बता दें कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों की संख्या मंत्रालय द्वारा एम्स की मदद से कराए सर्वे में सामने आई थी।
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