नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस सम्मेलन का आयोजन बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। इसका आयोजन 2 से 4 मार्च के बीच डिजिटल माध्यम से होगा। इसमें कई देशों के प्रतिनिधि अपने विचार साझा करेंगे। तीन दिवसीय इस शिखर सम्मेलन के लिए डेनमार्क सहयोगी देश है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए मैरीटाइम इंडिया समिट 2021 का उद्घाटन किया। 50 देशों के एक लाख से ज्यादा प्रतिभागियों ने इस समिट के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। पीएम मोदी ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन समुद्री क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाएगा और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री ने विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। कहा, ‘भारत की लंबी तटरेखा को आपको इंतजार है। भारत के मेहनती लोग आपका इंतजार कर रहे हैं। हमारे बंदरगाहों में निवेश करें। हमारे लोगों में निवेश करें। भारत को अपना पसंदीदा व्यापार स्थल बनाएं। भारतीय बंदरगाहों को अपने व्यापार और वाणिज्य हेतु बंदरगाह बनाएं। भारत सरकार घरेलू शिप बिल्डिंग और शिप रिपेयर मार्केट पर भी ध्यान दे रही है।
डोमेस्टिक शिप प्रोडक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए हमने भारतीय शिपयार्ड के लिए जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति को मंजूरी दी। 78 पोर्ट के बगल में पर्यटन विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा प्रकाशस्तंभों और इसके आसपास के क्षेत्रों को अद्वितीय समुद्री पर्यटन स्थलों में विकसित करना है। हमारे बंदरगाहों ने इनबाउंड और आउटबाउंड कार्गो के लिए वेटिंग टाइमिंग काफी कम कर दिया है। हम पोर्ट और प्ले-एंड-प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर में स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने के लिए काफी निवेश कर रहे हैं।
इससे उद्योगों को पोर्ट लैंड के लिए आकर्षित किया जा सकेगा। 014 में प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता जो लगभग 870 मिलियन टन प्रति वर्ष थी, अब बढ़कर लगभग 1550 मिलियन टन सालाना हो गई है। इस उत्पादकता लाभ से न केवल हमारे बंदरगाहों को बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि समिट समुद्री क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। देश में बंदरगाहों का आधुनिकीकरण हो रहा है।
हमने इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मैरीटाइम विजन तैयार किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय समुद्री क्षेत्र में आधुनिकीकरण, विकास, क्रूज पर्यटन, रोपैक्स फेरी सेवा, सीप्लेन सेवा की मांग बढ़ रही है।
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