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Jammu (Tawi) 180001 (J&K Union Territory) Updated, 27th, Jan. 2021.Wed, 3:45 PM (IST) : Team Work: Kuldeep & Sandeep Agerwal , बोर्डोक्स: भारतीय वायुसेना की फायर पॉवर को बढ़ाने के लिए तीन और राफेल लड़ाकू विमानों ने फ्रांस से भारत के लिए उड़ान भरी है। ये तीनों लड़ाकू विमान बोर्डोक्स से अंबाला तक का सफल बिना रूके पूरा करेंगे। सफर के दौरान इन विमानों में संयुक्त अरब अमीरात के एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (MRTT) के जरिए ईंधन भरा जाएगा। तीनों नए राफेल लड़ाकू विमानों के बुधवार रात 11 बजे गुजरात के जामनगर एयरबेस पर लैंड होने की उम्मीद है।जामनगर में विमान की कस्टम संबंधी सभी औपचारिकता पूरी की जाएगी। इसके बाद ये विमान दोबारा उड़ान भरकर अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे। जहां इन्हें 17 गोल्डन एरो स्क्वॉड्रन में शामिल किया जाएगा। इन तीन विमानों के भारत पहुंचने के बाद एयरफोर्स के बेड़े में राफेल की संख्या 11 हो जाएगी। बता दें कि पांच राफेल विमानों के पहले बैच को 10 सितंबर को भारतीय वायुसेना में कमीशन किया गया था। इसके बाद नवबंर 2020 में तीन और राफेल विमान भारत पहुंचे थे।राफेल विमान फ्रांस से भारत तक का सफर पूरा करने के दौरान लगभग 1000 किमी प्रतिघंटे की गति से उड़ान भरेंगे। हालांकि, राफेल की अधितकम स्पीड 2222 किमी प्रति घंटा है। ये राफेल विमान पूर्ण रूप से कॉम्बेट रेडी पोजिशन में होंगे। जिन्हें कुछ दिनों के अंदर ही किसी भी ऑपरेशन में लगाया जा सकेगा।चीन से लगती सीमा में चरम तापमान को देखते हुए इस विमान में भारत ने अपने हिसाब से कुछ मोडिफिकेशन भी करवाएं हैं। जिससे कम तापमान में भी यह विमान आसानी से स्टॉर्ट हो सकता है। पहले बैच में भारत पहुंचे 5 राफेल विमानों के 250 घंटे से भी ज्यादा की उड़ान और फील्ड फायरिंग टेस्ट किए जा चुके हैं। इन विमानों को अंबाला में 17 गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल किया गया है।भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए सौदा किया था। 36 राफेल विमानों में से 30 लड़ाकू विमान होंगे और छह प्रशिक्षण विमान। प्रशिक्षण विमानों में दो सीट होंगी और उनमें लड़ाकू विमान वाली लगभग सभी विशेषताएं होंगी। राफेल विमान, रूस से सुखोई विमानों की खरीद के बाद 23 वर्षों में लड़ाकू विमानों की भारत की पहली बड़ी खरीद है।भारत में जो राफेल आए हैं, उनके साथ Meteor बियांड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, MICA मल्टी मिशन एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP डीप-स्ट्राइक क्रूज मिसाइल्स लगी हैं। इससे भारतीय वायुसेना के जांबाजों को हवा और जमीन पर टारगेट्स को उड़ाने की जबर्दस्त क्षमता हासिल हो चुकी है। Meteor मिसाइलें नो-एस्केप जोन के साथ आती हैं यानी इनसे बचा नहीं जा सकता। यह फिलहाल मौजूद मीडियम रेंज की एयर-टू-एयर मिसाइलों से तीन गुना ज्यादा ताकतवर हैं। इस मिसाइल सिस्टम के साथ एक खास रॉकेट मोटर लगा है जो इसे 120 किलोमीटर की रेंज देता है।
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