नई दिल्ली । राज्यसभा सदस्यता रद किए जाने के मामले में शरद यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि राज्यसभा के सभापति को उन्होंने पक्षकार कैसे बनाया है। जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने राज्यसभा से अयोग्य करार दिए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसी की सुनवाई के दौरान जस्टिस विभू बाखरू ने यादव से यह प्रश्न किया। शुक्रवार को कोर्ट इस बात पर सुनवाई करेगा कि शरद यादव को संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जाए या नहीं।
बता दें कि यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्यसभा के सभापति देश के उपराष्ट्रपति भी हैं। उन्हें इसलिए पक्षकार बनाया गया है क्योंकि उनके द्वारा 4 दिसंबर को सदस्यता समाप्त करने के लिए पारित आदेश दुर्भावनापूर्ण से प्रेरित है। इससे पहले, राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि याचिकाकर्ता को किसी भी तरह की अंतरिम राहत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि अंतरिम आदेश पर संसद के शीतकालीन सत्र में यादव को भाग लेने की अनुमति देना एक तरह से उनकी सदस्यता बहाल करने जैसी होगी।
बता दें कि यादव ने कोर्ट से शुक्रवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होने की अनुमति के लिए अंतरिम आदेश की मांग की है। शरद यादव सदन में पिछले साल चुने गए थे और उनका कार्यकाल जुलाई 2022 में समाप्त होना था।
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